उद्योग विभाग की कार्यकारी इकाई राज्य उद्योग के सर्वोत्तम विकास के लिए सरकारी नीतियों को कार्यन्वयन करने में लगी हुई है और उत्तर प्रदेश को औद्योगिक उत्पादन और निवेश के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करना है ताकि राज्य उद्यम विकास के दृष्टिकोण से सर्वोच्च स्थान पर आ सके।

उद्योग एवं उद्यम संवर्धन निदेशालय की भूमिका :

  • केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के कार्यक्रमों एवं योजनाओं को कार्यन्वयन करते हुए उद्योग विकास को बढ़ावा और रोजगार सृजन करना।
  • उद्योग विकास की योजना सृजन के साथ-साथ इंफ्रास्ट्रक्चर के उन्नयन के लिए इनपुट प्रदान करना।
  • राज्य एवं केंद्र सरकार की नीतियों के साथ समन्वय बनाना एवं निष्पादन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करना।
  • योजना एवं बजट प्रस्ताव को बनाना।
  • एजेंसी एवं विभागों से समन्वय बनाए रखना, जो उद्योग से संबंधित हों, जैसे- विद्युत, प्रदूषण, राज्य स्तरीय निगम और अन्य विभाग एवं वित्तयी संस्थान।
  • प्रदर्शनी, मेले, प्रचार एवं प्रसार के जरिए औद्योगिक इकाइयों तक विपणन की सुविधाएं पहुंचाना।
  • संघों, संस्थाओं, भारत सरकार और राज्य सरकार की योजनाओं के जरिए तकनीकि उन्नयन की सुविधाएं देना।
  • इस क्षेत्र में मानव संसाधन को और मजबूत बनाने के लिए उद्यमिता विकास कार्यक्रमों के जरिए प्रशिक्षण, संवेदीकरण का आयोजन करना।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रबंधकीय गुणों के उन्नयन के जरिए निर्यात क्षमता को बढ़ाना।
  • क्लस्टर विकास कार्यक्रम और पारंपरिक उद्योग और हस्तशिल्प के जरिए उद्योगों और उद्यमों की क्षमता को बढ़ाना।
  • एमएसएमईडी अधिनियम के आधीन सूक्ष्म एवं लघु उद्योग फैसिलिटेशन काउंसिल के लिए बनाए गए संदर्भ निर्धारित करना।
  • 80 बड़े औद्योगिक संपत्ति और 198 छोटे औद्योगिक संपत्ति की देख-रेख करना।
  • पूरे राज्य में सर्वेक्षण का आयोजन करना।

75 जिला उद्योग और उद्यम उन्नयन केंद्रों एवं 18 परिक्षेत्र कार्यालयों के जरिए निदेशालय की पूरे यूपी में पहुंच है।

उद्योग के फायदे के लिए फील्ड कार्यालय के जरिए मुख्य सेवाएं जो प्रदान और जिनका अनुश्रवण किया जा रहा है-

  • उद्योग आधार की अभीस्वकृति की सुविधा प्रदान करना।
  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का प्रचार।
  • हस्तशिल्पकारों का प्रचार।
  • विभिन्न नीति/योजनाओं के तहत विभिन्न इंसेंटिव का प्रशासन।
  • जिला स्तरीय उद्योग बंधु सभा का आयोजन।
  • क्लस्टर का प्रचार एवं विकास।
  • स्व-रोजगार योजनाओं का कार्यन्वयन।
  • प्रदर्शनी, मेले एवं प्रचार का आयोजन करना।
  • उद्यमों की शिकायत निवारण।
  • उद्योग एवं सेवा उद्योमियों हेतु निर्देश और फैसिलिटेटर।
  • एमएसएमईडी अधिनियम-2006 के अनुसार एमएसएमई को यूएएम अभिस्वकृति का निर्गमन।
  • औद्योगिक विकास हेतु योजना एवं नीति सृजन।
  • केंद्र एवं राज्य सरकार की स्व-रोजगार योजनाओं का कार्यन्वयन।
  • औद्योगिकीकरण के उन्नयन के लिए केंद्र सरकार एवं प्रदेश विभागों के साथ समन्वय।
  • हस्तशिल्प एवं निर्यात का प्रचार।
  • अंतर-विभागीय समन्वय।